Wednesday, July 6, 2022
उत्तर प्रदेशजौनपुरबंदूकों के साये में इंटर की परीक्षा देने वाले धनंजय सिंह पर...

बंदूकों के साये में इंटर की परीक्षा देने वाले धनंजय सिंह पर 10वीं में ही लगा था हत्या का आरोप

मऊ के पूर्व ज्येष्ठ उप प्रमुख अजीत सिंह की हत्या में बाहुबली पूर्व सांसद धनंजय सिंह को गिरफ्तार करने का आदेश अदालत ने दिया तो शनिवार की दोपहर बाद लखनऊ से बनारस तक खलबली मच गई। लखनऊ यूनिवर्सिटी की छात्र राजनीति से जरायम जगत में दखल बनाकर विधानसभा और संसद तक का सफर तय करने वाले धनंजय और उनके समर्थकों के लिए अदालत का आदेश एक बड़ा झटका माना जा रहा है।
न्यायालय की तरफ से आरोपित धनंजय सिंह का गिरफ्तारी वारंट जारी होने के बाद पुलिस की टीम दबिश दे रही है। हालांकि अभी तक पूर्व सांसद का कोई सुराग नहीं मिल सका है। लखनऊ पुलिस बाहुबली पूर्व सांसद की तलाश में दबिश दे रही है। पुलिस ने बाहुबली के ठिकानों पर भी दबिश दी थी, लेकिन धनजंय वहां नहीं मिले।
पुलिस आयुक्त डीके ठाकुर ने क्राइम ब्रांच और विभूतिखंड थाने की पुलिस को जौनपुर रवाना किया है। माना जा रहा है कि बहुत जल्द लखनऊ पुलिस धनंजय सिंह को गिरफ्तार कर लेगी। सूत्रों के मुताबिक सीजीएम कोर्ट लखनऊ से गिरफ्तारी वारंट जारी होने की सूचना मिलने के बाद बाहुबली पूर्व सांसद अंडरग्राउंड हो गया है। बताया जा रहा है कि शनिवार देर रात पुलिस ने जौनपुर में संभावित ठिकानों पर दबिश दी थी, लेकिन वहां कोई सफलता नहीं मिली।

धनंजय सिंह पर जौनपुर,लखनऊ और दिल्ली सहित अन्य जगह 40 मुकदमे दर्ज हैं। इनमें सर्वाधिक 19 मुकदमे लखनऊ के विभिन्न थानों में हैं। बीते साल 10 मई को जौनपुर जिले में एसटीपी के प्रोजेक्ट मैनेजर अभिनव सिंघल के अपहरण और रंगदारी के मामले में गिरफ्तार धनंजय सिंह 109 दिन बाद 28 अगस्त को जमानत पर रिहा हुए थे।

हाईस्कूल में ही लग गया था हत्या का आरोप

जब बच्चे अक्सर अपनी पढ़ाई लिखाई और ज्ञान विज्ञान के लिए जाने जाते हैं तब 14 साल की उम्र में ही धनजंय सिंह पर एक शिक्षक की हत्या का आरोप लग गया था। यहीं से ये नाम सुर्ख़ियो में आ गया। इंटर में पहुँचे तो क्रिकेट के शौकीन इस किशोर पर एक युवक की हत्या का आरोप लगा।

पचासों पुलिसकर्मी करते थे रखवाली

जिस समय युवक के हत्या के आरोप में धनंजय की गिरफ्तारी हुई वो 12वीं में थे। परीक्षा के तीन पेपर रह गए थे। सिकरारा थाना इलाके के एक इंटर कॉलेज में पचासों बंदूकधारी पुलिसकर्मियों की तैनाती के बीच इनकी परीक्षा कराई जाती थी। क्योंकि परीक्षा का इलाका राजपूतों के गढ़ में था ऐसा माना जाता था कि धनंजय सिंह कभी भी भाग सकते हैं।

लखनऊ यूनिवर्सिटी में बटोरी आपराधिक सुर्खियां

धनंजय को जमानत मिली इंटर पास करते ही जिले के टीडी कॉलेज में दाखिला लिया। पर यहां भी अपने तेवर के मुताबिक कुछ ही दिन में छात्र राजनीति में दबदबा बनाना चाहा। घर वालों को जानकारी हुई तो बड़े भाई ने इन्हें जौनपुर से हटाकर लखनऊ विश्वविद्यालय पढ़ने भेज दिया। स्नातक में दाखिला लेने के बाद एक के बाद एक कारनामें कर प्रदेश की राजधानी में अपने नाम का बड़ा खौफ जमा दिया।
लखनऊ विश्वविद्यालय में मंडल कमीशन का विरोध कर धनंजय ने अपनी छात्र राजनीति को धार दी। लखनऊ विश्वविद्यालय में ही एक नेता के संपर्क में धनंजय आए और फिर हत्या, सरकारी ठेकों से वसूली, रंगदारी जैसे मुकदमों में नाम आने की वजह से धनंजय सुर्खियों में रहे।
1998 तक धनंजय का नाम लखनऊ से लेकर पूर्वांचल तक जरायम जगत में सुर्खियों में आ चुका था और उन पर पुलिस की ओर से 50 हजार का इनाम घोषित हो चुका था। स्नातक होते होते धनंजय पर कई थानों में दर्जन भर से अधिक मामले दर्ज ही गए।

एनकाउंटर निकला फर्जी, किया आत्मसमर्पण

साल तकरीबन 1998-99 एक हत्या के मामले के बाद धनंजय सिंह फरार हो गये। पुलिस ने इनपर इनाम घोषित कर दिया। इसी समय भदोही जिले के औराई में सीओ आख़िलानन्द मिश्रा को खबर लगी की सरोई पुलिया के पास ढाबे पर धनंजय चाय पी रहा है। पुलिस टीम ने एक पुलिस एनकाउंटर चार युवकों को मार दिया। मारे गए एक युवक का नाम भी धनंजय था। सीओ ने दावा किया की अपराधी धनंजय सिंह को मार गिराया। जबकि असल में ये धनंजय सिंह नहीं कोई बेगुनाह युवक मारा गया था।
हालांकि धनंजय जिंदा थे और भूमिगत हो गए थे। फरवरी 1999 में धनंजय पुलिस के सामने पेश हुए तो भदोही की फर्जी मुठभेड़ का पर्दाफाश हुआ। धनंजय के जिंदा सामने आने पर मानवाधिकार आयोग ने जांच शुरू की और फर्जी मुठभेड़ में शामिल रहे 34 पुलिसकर्मियों पर मुकदमे दर्ज हुए औऱ सीओ आख़िलानन्द सस्पेंड कर दिए गए।

राजनीतिक सफर

2002 में रारी विधानसभा से निर्दल विधायक बने। 2007 का भी चुनाव जीत लिया। 2009 में बसपा के टिकट पर जौनपुर लोकसभा सीट से सांसद बने। मल्हनी सीट पर उपचुनाव हुए तो अपने पिता राजदेव को बसपा के टिकट पर विधासभा का चुनाव जिताया। 2014 में जौनपुर से फिर लड़े भाजपा लहर में हार मिली। 2017 में मल्हनी विधानसभा से लड़े सपा के पारसनाथ से हार गए। पिछले वर्ष 2020 विधायक पारसनाथ के निधन के बाद हुए रिक्त मल्हनी विधानसभा उपचुनाव में लकी यादव से चुनाव हार गए।

मुन्ना बजरंगी मर्डर में लगा आरोप

बागपत जेल में दुर्दान्त अपराधी मुन्ना बजरंगी की हत्या के बाद उनकी पत्नी ने धनंजय पर हत्या की साजिश का आरोप लगाया। हालांकि इसमें भी आरोप साबित नहीं हुआ।

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