Tuesday, July 5, 2022
भदोहीसफलता के बाद नफ़रत भी प्यार में बदल जाता है 21 वर्षिय...

सफलता के बाद नफ़रत भी प्यार में बदल जाता है 21 वर्षिय युवा ने किया इस तरह करामात की महाराष्ट्र की सराकर को उत्तर भारतीयों से हुआ लगाव

भदोही । आइये जानते है उस 21 वर्ष के नौजवान को जिसने महाराष्ट्र के सरकार से जुड़े राजठाकरे को अपनी स्वागत करने पर किया मजबूर, जी हां हम उस उस शख्स की बात कर रहे है जिसकी बातें जनपद भदोही में ही नही बल्कि पूरे प्रेदश में चर्चा का विषय बन गया । एक अलग पहचान मिला (साइक्लिंस्ट) गोविंद यादव जो जनपद भदोही के रहने वाले है ।

क्या है कहानी गोबिंद साइकिलिंस्ट की आइये जानते है जहाँ साइकिल चलाना लोग अपनी बेइज्जती समझते है उसी को बनाया गोबिन्द ने बनाया अपना सवांरी
जनपद भदोही के दो नौजवान साथियों ने आज के 6 साल पहले पेड़ बचाओ पेड़ लगाओ इस पहल की शुरूआत की । जिसका मुख्य उद्देश्य था कि जब जब जब आप खुशियां मनाये तब तब पेड़ लगाए और इस पहल को आगे ले जाने के लिए इसको एक नाम दिया एक नई पहल एक नई कोशिश जिसको संचालित करने वाले कृष्णकुमार यादव श्याम बहादुर यादव
है इन बंधुओ ने मिलकर जनपद भर में लगातार पेड़ लगाते गए और पर्यावरण के संरक्षण को बचाये रखने के लिए लोगो को जागरूक करना यह इनका मकसद बन गया जो जनपद भदोही से निकलकर अब प्रदेश और देश स्तर तक पहूंच गया है । इन्ही लोगो से मिली प्रेरणा को लेकर गोविंद के अंदर जुनून सा लगने लगा और गोविंद जल के संरक्षण को अपना लक्ष्य बनाये फिर क्या निकल पड़ी साईकिल ।

लोगो को जागरूक करना ही बन गया लक्ष्य –
गोविंद यादव 2019 में भी वाराणसी से लालबाग मुम्बई जल है तो कल है के लिए साइकिल यात्रा का सफर कर चुके थे । लेकिन उनके मन मे यह बन गया कि अब मुझे जन जन तक यह बात पहुचाना है तो इन्होंने इस बार यात्रा प्रारंभ 26 जनवरी 2021 को रिजर्व पुलिस लाइन ज्ञानपुर से जनपद भदोही के पुलिस अधीक्षक को सूचित करते हुए फिर यात्रा पर निकले।

सफर को आसान बनाया लोगो का प्यार – कहते है न जब हौसला मिलता रहे तो खुद का दर्द भी कम लगने लगता है कुछ इसी तरह गोविंद जी जब जनपद भदोही से निकलकर वाराणसी दस्वाधमेघ गंगा घाट से जल को लेकर इलाहाबाद,लखनऊ,से होते हुए दिल्ली की तरफ बढ़ने लगे । बीच बीच मे इन्हें रोक-कर इन्हें चाहने वाले इनका स्वागत करते थे इसी बीच उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री अखिलेश यादव जी ने भी बीच सड़क पर रोक-कर बधाई दी और आगे बढ़ने को कहा
दिल्ली से आगे निकले ग्वालियर के रास्ते से होते हुए पुणे तक का सफर फिर वहां से अपनी मंजिल की तरफ मुम्बई को निकल पड़े और 18फरवरी शाम को आखिर में वो मुंबई की धरती पर पहुच कर 19 फ़रवरी को सुबह महाराज छत्रपति शिवाजी की पुण्य तिथि के दिन गंगा जल से स्नान करवाये इस 25 दिन लगातार कुल 2967 किलोमीटर की यात्रा साइकिल से तय कर डाला ।

माननीय राजठाकरे जी को मिली सूचना गोबिंद यादव की –
उत्त्तर भारतीयों से नफरत करने वाले राजठाकरे को जब यह ख़बर मिली कि कोई नौजवान उत्तर प्रदेश जनपद भदोही का जो वाराणसी से साइकिल यात्रा करके वाराणसी से गंगाजल लेकर आया था छत्रपती शिवाजी महाराज की पुण्य तिथि पर तो राजठाकरे साहब के अंतरात्मा को झकझोर कर रख दिया कि इतने प्रेमी है उत्तर भारतीय मुम्बई के प्रति तो उन्होंने अपने लोगो से गोबिंद जी को अपने निजी आवास पर बुलाकर उन्हें सम्मानित किया और उत्तर भारतीयों को आश्वासन दिया कि उन्हें भी उत्तर भारतीय पसंद है ।
और गोविंद जी को शुभकामनाएं दी कि आप लगातार जल है तो कल है संरक्षण को लोगों तक पहुंचाते रहे ।

गोविंद यादव ने आख़िर क्यो चुना साइकिल से ही सफर करना – गोविंद यादव एक मध्यम परिवार से हैं और साईकिल का सफर इसलिए चुना की वह धीरे-धीरे अपनी यात्रा पूरी कर लेंगे और लोगों से मिलते हुए बताते हुए जल है तो कल है जल बचाओ का अभियान लोगों तक संदेश देते हुए धीरे-धीरे वह अपने लक्ष्य की तरफ बढ़ते गए और उन्होंने सब को यह संदेश दिया है कि अगर आपने करने की क्षमता है तो आप कुछ भी हासिल कर सकते हैं छोटी चीजें भी बड़ी बनाई जा सकती हैं ।

जाति धर्म पर भी कहां गए बड़ी बात – छोटी सी उम्र में गोविंद जी ने या बताया कि मैं एक यादव परिवार से हूं मैं 3000 किलोमीटर के लगभग साइकिल से यात्रा तय किया ज्यादातर लोगों ने सहयोग किया मेरे समुदाय वालों ने जबकि मैं संपूर्ण विश्व के लिए जनसंदेश लेकर चला था जल ही जीवन है जल है तो कल है आइए मिलकर बचाते हैं जल को उन्होंने यह अपने मन की पीड़ा लोगों से बताया कि मेरा किसी जाति या धर्म से कोई मतलब नहीं है अगर लोग मेरा सहयोग करते तो मैं पूरे विश्व में यह संदेश पहुंचा देता लेकिन मेरी पूरी कोशिश रहेगी यह संदेश में लगातार हर वर्ष साइकिल की यात्रा से ही अपने संदेश को देता रहूंगा ।

चरण चूम लेती है आ करके मंजिल मुसाफिर अगर अपनी हिम्मत ना हारे

रमाकान्त यादव

ज्ञानपुर भदोही

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