Wednesday, December 7, 2022
उत्तर प्रदेशपोषण पुनर्वास केंद्र कुपोषित बच्चों को दे रहा नया जीवन

पोषण पुनर्वास केंद्र कुपोषित बच्चों को दे रहा नया जीवन

चंदौली –जिला अस्पताल स्थित पोषण पुनर्वास केंद्र (एनआरसी) में कुपोषित बच्चों को नया जीवन मिल रहा है। लॉकडाउन के दौरान एनआरसी केंद्र में अतिकुपोषित व बीमार बच्चों को चिकित्सा सुविधा यानि भर्ती होने के बाद बच्चों का इलाज व जांच के साथ ही पोषक तत्व युक्त विशेष आहार दिया जा रहा है | देखा जाए तो लॉकडाउन के दौरान सबसे ज्यादा परेशानी प्रवासी मजदूरों को हुई । मजदूरी बंद होने से बच्चों के पालन पोषण की समस्या के साथ ही उनमें कुपोषण की समस्या बढ़ गई थी |
ब्लॉक नियामताबाद निवासी पिता बृजेश ने बताया कि नौ माह की अनुष्का बहुत कमजोर हो गई थी । वजन बहुत कम हो गया था | अनुष्का रोती भी बहुत थी । कुछ भी खाती तो उल्टी हो जाती थी | मेरे पास उतने पैसे नहीं थे कि मैं उसका इलाज करवा सकूँ । मजदूरी से ही उनका घर चलता है । कई महीनों से घर बैठा हूँ जिस कारण मैं किसी डॉक्टर को नहीं दिखा पा रहा था | डर लग रहा था बच्चे को लेकर तब मैंने उसे एनआरसी केंद्र में भर्ती किया । भर्ती के समय बच्चे का वजन 4.200 किलोग्राम था । 12 दिन के बाद 5.200 किलो होने पर डिस्चार्ज किया| घर लाने के बाद भी दो – तीन बार जांच हुई । अनुष्का अब बिल्कुल ठीक है | उन्होने कहा कि गरीब बच्चों के लिए एनआरसी एक मंदिर हैं |
ब्लॉक चकिया निवासी माँ शबा परवीन ने बताया कि आरसी तीन साल का है | उसे पेट में दर्द और दस्त हो रही थी । लगातार उसकी तबीयत बिगड़ती जा रही थी | पैसे की कमी के कारण उसका इलाज भी नहीं करा पा रही थी | तब उसे एनआरसी केंद्र में भर्ती करवायी तब वजन 6.8500 किलो था और दस दिन में ही 7.990 किलो से ज्यादा वजन बढ़ गया । एनआरसी केंद्र की वजह से मेरा बच्चा बिल्कुल स्वस्थ है ।
ब्लॉक चकिया निवासी माँ समा देवी ने बताया कि मेरी बेटी तीन साल की दिशा बहुत कमजोर हो गई थी । खाना पच नहीं रहा था । बराबर उल्टियों हो रही थी | एनआरसी केंद्र में भर्ती कर जांच में पता चला कि दिशा को गंदा खाना व पानी के कारण पीलिया हो गया था | उस समय उसका वजन 6.850 किलो था । इलाज के कुछ दिनों बाद वजन 7.990 किलो हो गया | बेटी का एनआरसी में अच्छे से इलाज हुआ । साथ ही पोषणयुक्त खाना भी दिया गया | यहाँ गरीब लोगों के बच्चों की अच्छे से देखभाल व इलाज किया जाता है |
जिला संयुक्त चिकित्सालय के मुख्य चिकित्सा अधीक्षक डॉ सी पी कश्यप ने बताया कि जिला अस्पताल में एक अप्रैल 2016 को पोषण पुनर्वास केंद्र (एनआरसी) खोला गया था। तब से अब तक यहां 1500 से ज्यादा बच्चों को नया जीवन दिया जा चुका है। दस बेड के साथ वातानुकूलित व्यवस्था के साथ इस केंद्र में रोजाना कुपोषित बच्चे आते हैं जिनका सफतापूर्वक इलाज किया जाता हैं |
चिकित्सालय प्रबन्धक डॉ दिलशाद ने बताया कि इस केंद्र में छह माह से पांच साल तक के कुपोषित बच्चों का इलाज किया जाता है । यहां शुरुआती दौर में 14 दिन रखकर बच्चों का इलाज व पोषक तत्वों से युक्त आहार दिया जाता है। यह भोजन शुरुआती दौर में बच्चे को दो-दो घंटे बाद दिया जाता है। यह प्रक्रिया रात में भी चलती है। इसके अलावा बच्चे के साथ आने वाली बच्चे की मां या अन्य परिजन को भोजन के अलावा पचास रुपये रोजाना भत्ता भी दिया जाता है। इस दौरान 100 फीसदी बच्चे इस वार्ड से स्वस्थ होकर निकले हैं।
डॉ दिलशाद ने बताया कि इसके अलावा इलाज कराकर गए बच्चों का पुन: जांच के लिए लेकर आने पर भी उनको भत्ता दिया जाता है। यदि वह 15 दिन में इलाज का फॉलो अप कराने आते है तो उन्हें 140 रुपये मिलते है। यह भत्ता उन्हें दो महीने तक मिलता है।
डॉ दिलशाद ने कहा कि सभी आंगनबाड़ी कार्यकर्ताओं व सहायिकाओं को निर्देश दिया है कि वह अपने क्षेत्र पर कुपोषित बच्चों पर नजर रखें साथ ही कोई बच्चा कुपोषित मिले तो तत्काल उन्हें एनआरसी केंद्र में भर्ती कराएं ताकि बच्चे का जांच कर उपचार शुरू किया जा सके |

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