Monday, December 5, 2022
उत्तर प्रदेशचंदौलीमोदी लहर के साइड इफेक्ट्स:धृतराष्ट्र की भूमिका में जनप्रतिनिधि,गड्ढायुक्त सड़कें दिखा रही...

मोदी लहर के साइड इफेक्ट्स:धृतराष्ट्र की भूमिका में जनप्रतिनिधि,गड्ढायुक्त सड़कें दिखा रही आईना

योगी सरकार की गड्ढा मुक्त सड़कों का दावा अब सफेद हाथी साबित होता जा रहा है। इतना ही नहीं भाजपा के विधायकों के क्षेत्र में गड्ढा मुक्त सड़कों के लिए अब सपाजन आवाज उठाने लगे हैं।इसे देखकर जनता भी समझने लगी है कि हमने वोट कहां और किस को दिया,जो आंख पर पट्टी बांधे हुए उन गड्ढे वाले सड़कों से गुजर जा रहे हैं और झेलना जनता को पड़ रहा है। राजनैतिक उठापटक के बीच हम बात करें अलीनगर थाना से लेकर सकलडीहा मोड़ तक के सड़कों की और करवत से दांडी तक के सड़कों की तो दोनों जगह सड़कों की स्थिति इतनी बदतर है कि गड्ढे में सड़क या सड़क पर गड्ढा यह बात अब तक समझ में नहीं आई।यह हाल मात्र करवत या अलीनगर सकलडीहा का ही नही बल्कि सकलडीहा सैदपुर मार्ग,सकलडीहा-कमालपुर मार्ग का भी है| हैरानी की बात तो यह है कि इसी रास्ते से विधायक साधना सिंह,सैयदराजा विधायक सुशील सिंह, सांसद डॉ महेंद्र नाथ पांडेय, पुलिस अधीक्षक, जिला अधिकारी के अलावा कमिश्नर भी गुजरते हैं। लेकिन उनकी आंखों पर कौन सी पट्टी बांध दी जाती है कि लग्जरी गाड़ियों में उन्हें गड्ढों के झटके नहीं लगते। विगत दिनों इन गड्ढों में हुए प्रदर्शन के बाद सपा के सकलडीहा विधायक प्रभु नारायण सिंह यादव ने जिलाधिकारी को पत्र सौप कर इन गड्ढों को भरने का आग्रह किया था। जिसके बाद आज सकलडीहा मोड पर पीडब्ल्यूडी के अधिकारी गड्ढों को भरने की कवायद में जुटे।हैरानी की बात यह है कि स्थानीय नेता शिवशंकर पटेल भी करवत के गड्ढो से बचने के लिए गलत दिशा से वाहन ले जाते देखे जाते है तो सदर विधायक भी इसी रास्ते से कई बार आवागमन करती हैं।क्या उन्हें अब तक यह गड्ढे नहीं दिखे। आखिर ऐसी क्या विवशता है जो अब तक इन गड्ढों को भरने की कवायद शुरू नहीं हो पाई।इन बड़े-बड़े गड्ढों की वजह से लोग एकल मार्ग का प्रयोग करते हैं जो काफी खतरनाक भी है।ऐसे में क्या प्रशासन को किसी बड़े हादसे का इंतजार है।क्या हादसे के बाद ही गड्ढा भरा जाएगा। विकास का दावा करने वाले विकासपुरुष का दर्जा प्राप्त जिले के सांसद डॉ महेंद्र नाथ पांडेय भी इसी रास्ते से गुजरते हैं। क्या अब तक उनकी नजर इस रास्ते पर नहीं पड़ी या फिर उन्हें उनके चमचों ने गुमराह कर दिया।वजह चाहे जो भी हो लेकिन झेलना आम व्यक्ति को पड़ता है। जो वोट देकर अपना जनप्रतिनिधि चुनता है और बाद में जब उसकी समस्याएं नहीं सुनी जाती तो खुद को छला महसूस कर हाथ मलता रह जाता है।

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