Monday, November 28, 2022
Mirzapurहिंदी दिवस विशेषांक- चंद्रप्रभा के जंगलों की सुंदरता

हिंदी दिवस विशेषांक- चंद्रप्रभा के जंगलों की सुंदरता

संपादकीय डेस्क:- सूर्य भगवान अस्त होने के लिए जल्दी कर रहे हैं, शाम की ठंडी हवा अपनी चाल दिखा रही है। आसमान साफ है क्योंकि अभी-अभी पानी बरस चुका है और पछुआ हवा ने रुई के पहल की तरह जमे हुए बादलों को तूम-तूमकर उड़ा दिया है। अस्त होते हुए सूर्य की लालिमा ने आसमान पर अपना दखल जमा लिया है और निकले हुए इंद्रधनुष पर की शोभा और उसके रंगदार जौहर को अच्छी तरह उभाड़ रखा है।

बाग की रविशों जिन पर कुदरती भिश्ती अभी घंटा भर हुआ छिड़काव कर गया है, घूम-घूमकर देखने से धुले-धुलाये रंग-बिरंगे पत्तों की कैफियत और उन सफेद कलियों की बहार दिल और जिगर को क्या ही ताकत दे रही है जिनके एक तरफ का रंग तो असली मगर दूसरा हिस्सा अस्त होते हुए सूर्य की लालिमा पड़ने से ठीक सुनहला हो रहा है। उस तरफ से आये हुए खुशबू के झपेटे कहे देते हैं कि अभी तक तो आप दृष्टांत ही में अनहोनी समझकर कहा-सुना करते थे मगर आज ’सोने और सुगंध’ वाली कहावत देखिए अपनी आंखों के सामने मौजूद ये अधखिली कलियां सच किए देती हैं।

चमेली की टट्टियों में नाजुक-नाजुक सफेद फूल तो खिले हुए हई हैं मगर कहीं-कहीं पत्तियों में से छनकर आई हुई सूर्य की आखिरी किरणें धोखे में डालती हैं। यह समझकर कि आज इन्हीं सफेद चमेलियों में जर्द चमेली भी खिली हुई है शौक भरा हाथ बिना बढ़े नहीं रहता। सामने की बनाई हुई सब्जी जिसकी दूब सावधानी से काटकर मालियों ने सब्ज मखमली फर्श का नमूना दिखला दिया है, आंखों को क्या ही तरावट दे रही है!

देखिये उसी के चारों तरफ सजे हुए गमलों में खुशरंग पत्तों वाले छोटे-छोटे जंगली पौधे अपने हुस्न और जमाल के घमंड में कैसे ऐंठे जाते हैं। हर एक रविशों और क्यारियों के किनारे गुलमेंहदी के पेड़ ठीक पल्टनों की कतार की तरह खड़े दिखाई देते हैं, क्योंकि छुटपने ही से उनकी फैली हुई डालियां काटकर मालियों ने मनमानी सूरतें बना डाली हैं।

कहने ही को सूरजमुखी का फूल सूर्य की तरफ घूमा रहता है मगर नहीं यहां तो देखिये सामने सूरजमुखी के कितने ही पेड़ लगे हैं जिनके बड़े-बड़े फूल अस्त होते हुए दिवाकर की तरफ पीठ किए हसरत भरी निगाहों से देखती हुई उस हसीन नाजनीन को अलौकिक रूप की छटा दे रहे हैं जो उस बाग में बीचोंबीच बने हुए कमरे की छत पर खड़ी उसी तरफ देख रही है जिधर सूर्य भगवान अस्त होते दिख रहे हैं। उधर ही से बाग में आने का रास्ता है, मालूम होता है वह किसी आने वाले की राह देख रही है, तभी तोसूर्य की किरणों को सहकर भी एकटक उधर ही ध्यान लगाये है।

चंद्रकांता संतति(प्रथम अध्याय, बयान ११)

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