Wednesday, August 17, 2022
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Burj Khalifa Amazing facts:आसान नहीं था दुनिया की सबसे ऊंची इमारत बनाना

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Burj Khalifa Amazing facts:इंसानी प्रतिभा का एक सच्चा चमत्कार जहाँ की सूर्यास्त को भी एक ही दिन में दो बार देखा जा सकता है यकीन मानिए यह अजूबा मानव इतिहास की अब तक कि सबसे ऊंची इमारत बुर्ज ख़लीफ़ा(Burj Khalifa) से देखा जा सकता है ।

एक ऐसी इमारत जिस पर काम तो शुरू किया जा चुका था परंतु साथ ही साथ उसके Structure Design पर भी काम हो रहा था।बुर्ज खलीफा अपने डिजाइन और ऊंचाई के लिए दुनिया भर में मशहूर है लेकिन ज्यादातर लोगों को इस बात की जानकारी नहीं है कि इसमें कई फ्लोर पर लोगों को रहने की इजाजत नहीं है.

इससे संबंधित एक रोचक तथ्य जिसकी जानकारी कम ही लोगो को होगी जी हां इस इमारत को 95 किलोमीटर दूर से देखा जा सकता है। 830 मीटर ऊंची और 163 मंजिलो वाली इस इमारत में जो लिफ्ट लगी है वह दुनिया की सबसे तेज गति से चलने वाली लिफ्टों में से एक है.

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इस लिफ्ट की गति 10 मीटर/सेकंड है इसके ग्राउंड फ्लोर से 127 वीं मंजिल के Ovservation डेक तक पहुंचने में इंसान को केवल और केवल 1 मिनट का समय लगता है।इस बहु मंजिला इमारत के मालिक EMMAR Properties हैं।

आज के इस लेख में हम आपको इसके डिज़ाइन से लेकर कॉस्ट और तमाम खासियतो को बताएंगे जिसके बाद इस इमारत के दीदार को आपका भी दिल करेगा।

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06 जनवरी 2004 को दुबई की प्रॉपर्टी डेवलपर Emmar (Owner of Burj Khalifa) बुर्ज खलीफा के डिजाइन की जिम्मेदारी अमेरिका की Skidmore Owings & Merrill नामक कंपनी को दी. इस कंपनी के आर्किटेक्ट Adiran Smith को बुर्ज खलीफा के डिजाइन बनाने का श्रेय दिया जाता है।

इस इमारत के निर्माण का काम साउथ कोरिया की दिग्गज़ कंपनी Samsung C&T Corporation को दिया गया । खास बात तो यह है कि जब दुनिया की सबसे ऊंची इमारत(World tallest building) का बेस(Foundation) बनाया जा रहा था तब लोगों को पता तक नहीं था इसका पूरा डिजाइन कैसा रहने वाला है क्योंकि निर्माण का कार्य शुरू हो चुका था

साथ ही साथ डिजाइन पर भी काम किया जा रहा था आपको आश्चर्य होगा काम शुरू होने के 3 साल के अंदर ही इस बहुमंजिला इमारत ने रिकार्ड बनाना शुरू कर दिया था।

बुर्ज ख़लीफ़ा की ऊंचाई शुरू में तो उतनी नही थी मगर इसकी नींव इतनी मजबूत डाली गई थी कि इसकी ऊँचाई करीब 300 मीटर तक और बढ़ाई गई। ऊँचाई बढ़ने के साथ ही साथ इसकी कीमत में भी काफी इजाफा आया जिसकी वजह से इस प्रोजेक्ट को बनाने में अबू धाबी के प्रेसिडेंट खलीफा बिन ज़ायेद से सहायता ली गई.Burj Khalifa Amazing facts

उन्हीं के वित्तीय मदद से यह काम आगे बढ़ पाया, पहले इस इमारत का नाम बुर्ज टावर रखा गया था. लेकिन राष्ट्रपति के मदद के बाद से जब इसको खोला गया तो उनके सम्मान में इस इमारत का नाम बुर्ज खलीफा कर दिया गया.

बुर्ज ख़लीफ़ा बनाने में क्या थी मुश्किलें(What were the difficulties in building Burj Khalifa?)

बुर्ज खलीफा 192 मजबूत स्टील पाइल्स पर टीकी हुई इमारत है जो कि जमीन के अंदर 50 मीटर तक है. पूरे बुर्ज खलीफा का वज़न इन्ही 192 स्टील पाइल्स पर अलग अलग बराबर भागो में बांटा गया.

828 मीटर की ऊंचाई और 12 हजार वर्करों की मेहनत से तैयार इस इमारत की ऊंचाई इतनी अधिक थी कि कंक्रीट नीचे से ऊपर पहुंचाने में सुख जाया करती थी अब इतनी बड़ी इमारत में थोड़ी बहुत कंक्रीट तो लगनी नही थी आपको बता दे इस पूरी इमारत में एक लाख हाथियों के वजन के बराबर कंक्रीट लगाई गई है

ऐसे में केवल एक ही तरीका दिखा जिससे कि इसे ऊपर तक पहुंचाया जा सकता था वो था Concrete Suction System.और हुआ भी यही इसी तरीके को अख्तियार कर के इसके ढांचे को और ऊपर तक ले जाया गया Burj Khalifa Amazing facts

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बुर्ज ख़लीफ़ा के कंस्ट्रक्शन(Burj Khalifa Construction) के समय एक बड़ा मशला यह भी था इतनी ऊँची इमारत पर विंडो पैनल जो लगाया गया उसके लगने के बाद दुबई की कड़कती गर्मी में बिल्डिंग के अंदर का तापमान 100 डिग्री तक पहुंच जाता ऐसे में किसी मानव के काम करने का सवाल ही नही उठता.

इसी सोच ने टीम को मुसीबत में डाल दिया इस समस्या से बिल्डिंग के इंटीरियर डिज़ाइन का कार्य करीब 18 महीने रुका रहा.समस्या यह थी कि आखिर इस तापमान को कम कैसे किया जाय.जॉन जेरेफ़ा नाम के मशहूर इंजीनियर ने इसका भी हल ढूंढ निकाला मगर यह तरकीब ज़रा महंगी थी टीम के पास इसके अलावा कोई दूसरा विकल्प मौजूद नही था.

इस खास किस्म के पैनल की खूबी यह थी कि सूर्य की किरण से निकलने वाली UV Rays को यह रिफ्लेक्ट कर देता था.एक पैनल को बनाने में तकरीबन 2000$ का खर्च आया था
बुर्ज खलीफा पर कुल 24000 ग्लास पैनल लगाए गए है.

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अब ज़रा इसकी कीमत को भी आकिये की आखिर इस ऐतिहासिक इमारत को बनाने कुल कितना खर्च हुआ होगा.इमारत को बनाने में करीब 1.5 बिलियन डॉलर्स का खर्च आया था.
इमारत तो जैसे तैसे तैयार हो गयी अब इसके सबसे ऊंचे भाग पर 136 मीटर ऊंची औऱ 350 टन वजन वाली स्टील की पाइप लगानी थी

ऐसे में सवाल यह भी था कि इतनी ऊंचाई पर इस भारी भरकम पाइप को कैसे ले जाया जाए यह नामुमकिन भी था इसके बाद इस पाइप को बिल्डिंग के अंदर ही बनाया गया और पाइप के छोटे छोटे भागो को लगा कर असबल किया गया।

इतना सब होने के बाद बाकी जो रह गया वह था फिनिशिंग का कार्य इन कांच के पैनल की सफाई कैसे की जाय इसके पीछे कोई राकेट साइंस भी न था बल्कि वर्करों को ही रस्सी के सहारे लटककर इन 24000 पैनल की पॉलिश करनी पड़ी ।

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