top newsउत्तरप्रदेशगाजीपुर न्यूज़गाजीपुर समाचारबेकिंग न्यूज़ब्रेकिंगभांवरकोल

Ghazipur news: भांवरकोल कुडेसर भागवत अमृत से मिटते हैं जीवन के विषाद : स्वामी हरिप्रकाश महाराज

कुडेसर में सीताराम महायज्ञ के चौथे दिन भागवत महात्म्य का भावपूर्ण विवेचन
भांवरकोल (गाजीपुर)। भांवरकोल ब्लॉक के कुडेसर गांव में चल रहे नौ दिवसीय श्री सीताराम महायज्ञ के चौथे दिन श्रद्धालुओं की भारी भीड़ उमड़ी। इस अवसर पर बजरंग अखाड़ा परिषद काशी पीठाधीश्वर स्वामी श्री हरिप्रकाश जी महाराज ने श्रीमद्भागवत कथा के दौरान भागवत महात्म्य का अत्यंत भावपूर्ण और दार्शनिक विवेचन किया।
कथावाचक ने कहा कि श्रीमद्भागवत केवल एक धार्मिक ग्रंथ नहीं, बल्कि साक्षात् अमृत है। इसे सुनने और आत्मसात करने वाला व्यक्ति जीवन के समस्त विषाद, मोह और अज्ञान से मुक्त हो जाता है। उन्होंने श्लोक का उल्लेख करते हुए कहा—
“निगम कल्प तरो गलितं फलं, शुक मुखादमृत द्रव संयुतम्।
पिबत भागवतं रस आलयं, मुहुरहो रसिका भुवि भावुका॥”
श्लोक का भावार्थ समझाते हुए महाराज जी ने कहा कि वेद रूपी कल्पवृक्ष से टपका हुआ यह परम मधुर फल ही श्रीमद्भागवत है, जो शुकदेव जी के मुख से निकले अमृतरस से परिपूर्ण है। इसे केवल पढ़ा नहीं जाता, बल्कि ‘पिया’ जाता है, क्योंकि यह आत्मा की तृष्णा को शांत करता है।
उन्होंने कहा कि जैसे प्यासा व्यक्ति जल पीकर तृप्त होता है, वैसे ही संसार के दुख, भय और अशांति से पीड़ित मनुष्य भागवत रूपी अमृत का पान कर आत्मिक शांति प्राप्त करता है। भागवत कथा मनुष्य को भोग से योग, अहंकार से विनम्रता और अज्ञान से ज्ञान की ओर ले जाती है।
महाराज जी ने कहा कि आज के भौतिकवादी और तनावपूर्ण युग में भागवत कथा मानव जीवन के लिए संजीवनी के समान है। यह न केवल ईश्वर से जोड़ती है, बल्कि मनुष्य को अपने कर्तव्यों, करुणा और सत्य के मार्ग पर चलने की प्रेरणा देती है।
अंत में उन्होंने श्रद्धालुओं से आह्वान किया कि भागवत के उपदेशों को दैनिक जीवन में उतारें, तभी जीवन सार्थक होगा और समाज में नैतिक व आध्यात्मिक चेतना का विस्तार संभव हो सकेगा।

Related Articles

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *

Back to top button