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Varanasi News : ज्ञानवापी सर्वे का दुसरा दिन, मिले मंदिरों के अवशेष

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Varanasi News : ज्ञानवापी सर्वे का दुसरा दिन, मिले मंदिरों के अवशेष

Varanasi News : पहले हाईकोर्ट, फिर सुप्रीम कोर्ट से हरी झंडी मिलने के बाद भारतीय पुरातत्व सर्वेक्षण (एएसआई) की टीम वाराणसी के बहुचर्चित ज्ञानवापी परिसर का सर्वे कर रही है। शनिवार को दूसरे दिन सर्वे की प्रक्रिया पूरी हुई। एएसआई की टीम ने दूसरे दिन मैपिंग का काम किया। तो वहीं ज्ञानवापी में व्यास जी के तहखाने में भी वीडियोग्राफी और फोटोग्राफी की गई। 3 डी इमेजिंग भी की गई।

दूसरे दिन की कार्रवाई में मसाजिद कमेटी भी शामिल रही। इस दौरान ज्ञानवापी परिसर के एक किलोमीटर के इर्द-गिर्द का दायरा भी छावनी में तब्दील रहा। शुक्रवार को करीब सवा सात घंटे तक सर्वे हुआ था। इससे पहले 24 जुलाई को करीब पांच घंटे सर्वे हुआ था। कड़ी सुरक्षा के बीच शनिवार सुबह 8 बजे एएसआई की टीम काशी विश्वनाथ धाम के गेट नंबर चार पर पहुंची।

एएसआई की चार टीमों ने छाना कोना-कोना

गहमागहमी के बीच सबकी सुरक्षा मानकों की जांच हुई, फिर सर्वे टीम को ज्ञानवापी परिसर में भेजा गया। दोपहर में नमाज के लिए सर्वे को एक घंटे के लिए रोका गया। इस दौरान सर्वे टीम ने लंच किया। दोपहर तीन बजे दोबारा सर्वे शुरू हुआ। एएसआई टीम के साथ दोनों पक्ष के एक-एक वकील तहखाने में उतरे।
इससे पहले सर्वे में चार टीमों ने ज्ञानवापी हॉल, तहखाना, पश्चिम दीवार, बाहरी दीवार का कोना-कोना छाना। माप-जोख भी की गई। दीवारों व उसके आसपास से साक्ष्य जुटाए गए। वजूखाने को छोड़कर पूरे परिसर का सर्वे होना है। सर्वे के बाद परिसर से बाहर आए महिला वादिनी और हिंदू-मुस्लिम पक्ष के अधिवक्तओं ने पूरी प्रक्रिया पर खुशी जताई और कहा कि एएसआई की टीम वैज्ञानिक तरीके से जांच कर रही है।

ज्ञानवापी से बाहर निकलने के बाद हिंदू पक्ष ने तहखाने में मूर्तियों के अवशेष मिलने का दावा किया। वादिनी चार महिलाओं के अधिवक्ता सुधीर त्रिपाठी ने बताया कि नंदी के सामने जो व्यास जी का तहखाना है। वहां से मूर्तियों के अवशेष मिले हैं। एएसआई गहराई से अध्ययन करते हुए बारीकी से सर्वे कर रही है। मुस्लिम पक्ष पूरी तरह से सहयोग कर रहा है। पश्चिमी दीवार को देख और समझ कर सर्वे के लिए विशेषज्ञ की टीम लगी हुई है। यह सर्वेक्षण अधिवक्ता आयुक्त की कमीशन की कार्रवाई से बहुत ही अलग है। इसका स्वरुप व्यापक है और यहां सब कुछ वैज्ञानिक पद्धति से हो रहा है।

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