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Ghazipur news: पीड़ित ने बहरियाबाद पुलिस पर लगाए गंभीर आरोप!.मुझे थाने में बैठाए रखा,उधर विवादित जमीन पर चलता रहा काम

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गाजीपुर:- ख़बर गाज़ीपुर ज़िले से है जहां पर बहरियाबाद थाना क्षेत्र के भरतपुर गांव में विवादित जमीन पर हैंडपंप गड़वाने को लेकर एक ऐसा मामला सामने आया है, जिसने पुलिस की कार्यप्रणाली और कानून-व्यवस्था को लेकर कई गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं। गांव निवासी 65 वर्षीय छन्नालाल जायसवाल ने बहरियाबाद पुलिस पर आरोप लगाया है कि न्यायालय में विचाराधीन भूमि विवाद के बावजूद पुलिस ने विपक्षी पक्ष को संरक्षण देते हुए विवादित भूमि पर हैंडपंप गड़वाने की अनुमति दी। पीड़ित का कहना है कि यदि उसके आरोप सही हैं तो यह न केवल निष्पक्ष पुलिसिंग पर प्रश्नचिह्न है, बल्कि आम लोगों के न्याय व्यवस्था पर विश्वास को भी कमजोर करने वाला मामला है।
पीड़ित छन्नालाल जायसवाल के अनुसार संबंधित भूमि का मामला न्यायालय में विचाराधीन है और दोनों पक्षों के बीच लंबे समय से विवाद चल रहा है। उनका कहना है कि जैसे ही उन्हें जानकारी मिली कि विपक्षी पक्ष विवादित जमीन पर हैंडपंप गड़वाने का कार्य शुरू करा रहा है, उन्होंने तत्काल इसकी सूचना बहरियाबाद पुलिस को दी और संभावित विवाद की आशंका जताई। आरोप है कि सूचना देने के बावजूद पुलिस ने मामले को गंभीरता से नहीं लिया और मौके पर जाकर काम रुकवाने के बजाय विपक्षी पक्ष को संरक्षण देती रही।
छन्नालाल जायसवाल का आरोप है कि पुलिस ने उन्हें थाने बुलाकर कई घंटे तक वहीं बैठाए रखा, जबकि उसी दौरान विवादित भूमि पर हैंडपंप गड़वाने का कार्य जारी रहा। उनका कहना है कि यदि पुलिस वास्तव में निष्पक्ष होती तो पहले मौके पर पहुंचकर यथास्थिति बनाए रखती और न्यायालय में लंबित मामले को देखते हुए किसी भी प्रकार के निर्माण या स्थापना कार्य को तत्काल रुकवाती।
पीड़ित का यह भी आरोप है कि पूरी कार्रवाई पुलिस की मिलीभगत से कराई गई। उनका कहना है कि उन्हें जानबूझकर थाने में रोककर रखा गया ताकि वे मौके पर जाकर विरोध न कर सकें और विपक्षी पक्ष अपना कार्य पूरा कर सके। इस पूरे घटनाक्रम को लेकर क्षेत्र में तरह-तरह की चर्चाएं हैं और ग्रामीण भी मामले की निष्पक्ष जांच की मांग कर रहे हैं।
जब इस संबंध में बहरियाबाद थानाध्यक्ष बासुदेव प्रसाद से पक्ष जानने का प्रयास किया गया तो उन्होंने बताया कि छन्नालाल जायसवाल को थाने से छोड़ दिया गया था तथा मौके पर चल रहे कार्य को भी रुकवा दिया गया है। हालांकि पीड़ित का दावा इससे अलग है। उनका कहना है कि जब थानाध्यक्ष द्वारा कार्य रुकवाने की बात कही जा रही थी, उसी समय मौके पर हैंडपंप गड़वाने का कार्य जारी था। इसी विरोधाभास ने पूरे मामले को और अधिक गंभीर बना दिया है।
कानूनी जानकारों का कहना है कि यदि कोई भूमि विवाद न्यायालय में विचाराधीन है तो संबंधित पक्षों को यथास्थिति बनाए रखने का प्रयास करना चाहिए और प्रशासन की भी जिम्मेदारी होती है कि किसी भी ऐसे कदम को रोके जिससे विवाद और गहरा हो या कानून-व्यवस्था प्रभावित हो। ऐसे मामलों में पुलिस की भूमिका पूरी तरह निष्पक्ष और पारदर्शी होनी चाहिए। फिलहाल यह मामला क्षेत्र में चर्चा का विषय बना हुआ है। ग्रामीणों और स्थानीय लोगों का कहना है कि पूरे घटनाक्रम की उच्चस्तरीय एवं निष्पक्ष जांच कराई जानी चाहिए ताकि यह स्पष्ट हो सके कि विवादित भूमि पर हैंडपंप गड़वाने की अनुमति किन परिस्थितियों में मिली, पुलिस ने मौके पर क्या कार्रवाई की और पीड़ित द्वारा लगाए गए आरोपों में कितनी सच्चाई है।
(नोटः इस समाचार में पुलिस पर लगाए गए आरोप पीड़ित पक्ष के दावों पर आधारित हैं। पुलिस का पक्ष भी शामिल किया गया है। मामले की सत्यता का अंतिम निर्धारण जांच अथवा न्यायालय की प्रक्रिया के बाद ही होगा।)

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