Ghazipur news: भ्रष्टाचार के विरुद्ध जंग लड़ रहे आरटीआई कार्यकर्ता को मिटाने की साजिश, कोर्ट के सख्त रुख से घबराए रसूखदारों ने शुरू किया उत्पीड़न का दौर
गाजीपुर। जनपद के शिक्षा विभाग में व्याप्त भ्रष्टाचार के विरुद्ध आरटीआई कार्यकर्ता के रूप में मोर्चा खोलने वाले सूर्यकांत त्रिपाठी अब रसूखदारों के निशाने पर हैं। विभाग की अनियमितताओं को उजागर करने और मामले को विधिक रूप से उठाने के कारण कार्यकर्ता को निरंतर मानसिक, शारीरिक और कानूनी रूप से प्रताड़ित करने का प्रयास किया जा रहा है।
*न्यायालय के कड़े निर्देश से रसूखदारों में हलचल*
शिक्षा विभाग से जुड़े एक गंभीर भ्रष्टाचार के प्रकरण में माननीय न्यायालय द्वारा विधिक कार्यवाही की जा रही है। इस मामले की संवेदनशीलता को देखते हुए माननीय न्यायालय ने 31 जनवरी 2026 को जिला अधिकारी गाजीपुर को संबंधित विभाग से आख्या प्राप्त कर प्रस्तुत करने के कड़े निर्देश दिए हैं। न्यायालय के इस सख्त रुख के बाद से ही आरटीआई कार्यकर्ता पर अनैतिक दबाव बनाने और जांच को प्रभावित करने के लिए साजिशों का जाल बुना जाने लगा है।
*पुलिस अधीक्षक को गुमराह करने और षड्यंत्र का खुलासा*
कार्यकर्ता के मनोबल को तोड़ने के लिए प्रबंधक रमेश दुबे ने पूर्व में सीधे पुलिस अधीक्षक गाजीपुर को प्रार्थना पत्र देकर गुमराह करने का प्रयास किया था। रमेश दुबे ने सूर्यकांत त्रिपाठी पर 1 लाख रुपये की अवैध वसूली का गंभीर और झूठा आरोप लगाया था। पुलिस अधीक्षक ने इस मामले की गंभीरता को देखते हुए इसकी जांच क्षेत्राधिकारी भुड़कुड़ा को सौंपी थी। क्षेत्राधिकारी भुड़कुड़ा द्वारा की गई सघन और निष्पक्ष जांच में रमेश दुबे के आरोप पूरी तरह झूठे पाए गए और सूर्यकांत त्रिपाठी को पूर्णतः निर्दोष पाया गया।
*प्रबंधक की पत्नी द्वारा महिला हेल्पलाइन का दुरुपयोग*
आरोप है कि अवैध वसूली के षड्यंत्र में विफल होने के बाद विपक्षी रमेश दुबे ने अब अपनी पत्नी के माध्यम से कार्यकर्ता के विरुद्ध महिला हेल्पलाइन 1090 को हथियार बनाया है। प्रबंधक की पत्नी द्वारा 1090 पर एक के बाद एक तीन बार फर्जी शिकायतें दर्ज कराई गईं, जिसमें पुलिस जांच में कार्यकर्ता हर बार निर्दोष पाए गए। इसके बावजूद कल पुनः 1090 के माध्यम से उन्हें फंसाने और पुलिस का भय दिखाकर दबाव बनाने का प्रयास किया गया है।
*जानलेवा हमला और प्रताड़ना का सिलसिला*
आरटीआई कार्यकर्ता सूर्यकांत त्रिपाठी ने पुलिस को अवगत कराया है कि पूर्व में प्रबंधक के पुत्र राहुल दुबे द्वारा उन्हें गाड़ी से कुचलने का प्रयास भी किया जा चुका है। इतना ही नहीं, 6 फरवरी 2026 को राहुल दुबे ने कार्यकर्ता के मोबाइल पर निरंतर 10 बार फोन कर उन्हें और उनके परिवार को गहरे मानसिक तनाव और भय की स्थिति में डाल दिया है।
*सुरक्षा और कठोर कार्रवाई की मांग*
निरंतर रची जा रही साजिशों और जानलेवा धमकियों से व्यथित होकर आरटीआई कार्यकर्ता ने पुलिस अधीक्षक को पत्र लिखकर रमेश दुबे उनकी पत्नी और उनके पुत्र राहुल दुबे के विरुद्ध कठोर दंडात्मक कार्यवाही की मांग की है। उन्होंने प्रशासन से अपनी जान-माल की सुरक्षा सुनिश्चित करने का अनुरोध किया है ताकि वे माननीय न्यायालय में चल रहे भ्रष्टाचार के मामले की निष्पक्ष पैरवी कर सकें।
अब देखना यह है कि प्रशासन इन रसूखदार दोषियों पर नकेल कसता है या भ्रष्टाचार के विरुद्ध उठने वाली आवाज को ऐसे ही दबाया जाता रहेगा।



